तनिक फेरो न नज़र मेरी ओर - धर्मेन्द्र कुमार पाठक
तनिक फेरो न नज़र मेरी ओर।।
भर गये मेरे नयनन के कोर,
कहां हो ओ मनमोहन चितचोर।।१।।
तुम कहां गये हो मुझे अब छोड़,
कपोलन पर ढरकत हैं नित लोर ।।२।।
जग में फिर फिर मैं हुआ कमजोर,
सुना ना जाये कोई अब शोर।।३।।
मेरे दुख का नहीं कोई छोर,
रहि रहिके दे करेजा खखोर ।।४।।
अच्छी रचना। भाव - विभोर करनेवाली पंक्तियां।
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