तनिक फेरो न नज़र मेरी ओर - धर्मेन्द्र कुमार पाठक

तनिक फेरो न नज़र मेरी ओर।।  भर गये मेरे नयनन  के कोर,  कहां हो ओ मनमोहन चितचोर।।१।। तुम  कहां गये हो मुझे अब छोड़, कपोलन पर  ढरकत हैं नित लोर ।।२।। जग में फिर फिर मैं हुआ कमजोर,  सुना ना जाये  कोई अब शोर।।३।। मेरे दुख का नहीं कोई छोर, रहि रहिके दे करेजा खखोर ।।४।।

संकट की घड़ी -धर्मेन्द्र कुमार पाठक

               संकट की घड़ी
                                  -धर्मेन्द्र कुमार पाठक.
 
कौन  देगा  साथ आज संकट की  इस  घड़ी में?
हर  कोई   है  यहां  तो  अपनी   ही  हड़बड़ी  में.

कौन   डालेगा   गले   में   सुप्रेम   का    पुष्पहार,
हर  कोई  है   खोया  दिखावे  की   फुलझड़ी  में?

मन  बहुत  बेचैन  है  अब  पाता  नहीं  कहीं चैन,
कौन  दिखाए  राह  गफलत की  इस गड़बड़ी में?

हम   जिसे   समझते  रहे  अपना   देते  थे  जान,
वही  जकड़  गया  है आज  हमें  इस हथकड़ी में.

किस एक पर अब मैं कर दूं अपने दिल को फिदा?
हर  कोई   है  खास  यहां  प्यार  की  इस  लड़ी में.

                             *****

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

मोहब्बत -धर्मेन्द्र कुमार पाठक

प्राणों का जंगल -धर्मेन्द्र कुमार पाठक

अलग ही मजा है ! -धर्मेन्द्र कुमार पाठक