तनिक फेरो न नज़र मेरी ओर - धर्मेन्द्र कुमार पाठक

तनिक फेरो न नज़र मेरी ओर।।  भर गये मेरे नयनन  के कोर,  कहां हो ओ मनमोहन चितचोर।।१।। तुम  कहां गये हो मुझे अब छोड़, कपोलन पर  ढरकत हैं नित लोर ।।२।। जग में फिर फिर मैं हुआ कमजोर,  सुना ना जाये  कोई अब शोर।।३।। मेरे दुख का नहीं कोई छोर, रहि रहिके दे करेजा खखोर ।।४।।

प्यार निभाया करो -धर्मेन्द्र कुमार पाठक


तुम  मुझे  इस कदर  ना सताया करो.
प्यार  है  तो   प्यार  को निभाया करो.

माना  जिंदगी  में  है  मुश्किल  बहुत,
फिर  भी  अपना  वादा निभाया करो.

जाने   कल  यह  जिंदगी  रहे  न  रहे,
जिंदा   हैं    तो   हाथ  मिलाया  करो.

हम  तेरी   मुस्कान  पर  ही  फिदा  हैं,
बस नजर प्यार का तुम  दिखाया करो.

मोहब्बत   निभाना   हंसी  खेल  नहीं,
बस   नजरों  से  नजरें  मिलाया  करो.

                      -धर्मेन्द्र कुमार पाठक.

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