तनिक फेरो न नज़र मेरी ओर - धर्मेन्द्र कुमार पाठक

तनिक फेरो न नज़र मेरी ओर।।  भर गये मेरे नयनन  के कोर,  कहां हो ओ मनमोहन चितचोर।।१।। तुम  कहां गये हो मुझे अब छोड़, कपोलन पर  ढरकत हैं नित लोर ।।२।। जग में फिर फिर मैं हुआ कमजोर,  सुना ना जाये  कोई अब शोर।।३।। मेरे दुख का नहीं कोई छोर, रहि रहिके दे करेजा खखोर ।।४।।

कोरोना के प्रहार (मगही गीत) -धर्मेन्द्र कुमार पाठक

 



जहिया  से  कोरोना  के  प्रहार  हो  गेल.
दुखवा   हमर  राई  से  पहाड़    हो  गेल.

इ   छोटकी  नींबूइया  अनार   हो    गेल,
सउसें  गउआं  हमर   बीमार   हो    गेल.

अमिया  के  पेड़बा   छतनार    हो  गेल, 
टिकोरवा   पर   लट्टू   संसार     हो  गेल.

सबसे   अगाड़ी   हमर  बिहार  हो   गेल, 
सांसत   में   सौंसे    सरकार    हो   गेल. 

मरघट  जइसन  सगरो बाजार हो गेल, 
सब   लूटेरवन  के जइसे बहार  हो गेल. 

धरममा    के   कई    ठेकेदार   हो  गेल, 
भूख  से  तड़पइत हमरो लिलार हो गेल. 

इ   दुनिया अब बहुत समझदार हो गेल,  
कोरोना  अब  बहुत  असरदार    हो गेल. 

सौंसे   दुनिया  मौत  के  बाजार  हो गेल,  
आदमी     सब   इहां   खरीदार   हो गेल.

अब  ठप  हमनी  सबके व्यापार हो गेल,  
आज   'धरम'  भी    बेरोजगार   हो गेल.

                        -धर्मेन्द्र कुमार पाठक.


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