तनिक फेरो न नज़र मेरी ओर - धर्मेन्द्र कुमार पाठक

तनिक फेरो न नज़र मेरी ओर।।  भर गये मेरे नयनन  के कोर,  कहां हो ओ मनमोहन चितचोर।।१।। तुम  कहां गये हो मुझे अब छोड़, कपोलन पर  ढरकत हैं नित लोर ।।२।। जग में फिर फिर मैं हुआ कमजोर,  सुना ना जाये  कोई अब शोर।।३।। मेरे दुख का नहीं कोई छोर, रहि रहिके दे करेजा खखोर ।।४।।

बाबा भोलेनाथ का मगही भजन-धर्मेन्द्र कुमार पाठक


श्रीहरिनाथेश्वर शिव,पाठक बिगहा,जहानाबाद  


भोला हमर बड़ी धुरवा रे,
                     पीस खाए भांग-धतूरवा।।

पीसहु के न गौरा के लूरवा रे,
                      कइसे खाये धतूरवा।।१।।

जटा से निकले गंगा के धरवा रे,
                      पीय भोर भिनसरवा।।२।।

बसहा बयल चढ़ल  सुरवा रे,
                    हाथ में  शोभे तिरशूलवा।।३।।

गले में नाग फुफकरवा रे,
                          माथ पर  चंदा के नूरवा।।४।।

डमरु बजावे डिमडिमवा रे,
                       संग नाचे भूत बैतलवा।।५।।

सबके नचावे हमर भोलवा रे,
                            नाचे चांद सूरुजवा।।६।।

कहिया फिरत हमर दिनवा रे,
              प्रभु कब देब अपन दरसनवा।।७।।


                          *-धर्मेन्द्र कुमार पाठक*

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