तनिक फेरो न नज़र मेरी ओर - धर्मेन्द्र कुमार पाठक

तनिक फेरो न नज़र मेरी ओर।।  भर गये मेरे नयनन  के कोर,  कहां हो ओ मनमोहन चितचोर।।१।। तुम  कहां गये हो मुझे अब छोड़, कपोलन पर  ढरकत हैं नित लोर ।।२।। जग में फिर फिर मैं हुआ कमजोर,  सुना ना जाये  कोई अब शोर।।३।। मेरे दुख का नहीं कोई छोर, रहि रहिके दे करेजा खखोर ।।४।।

प्यार -धर्मेन्द्र कुमार पाठक

 तुम से कुछ लेना न मेरा काम है.
प्यार तो सब कुछ देने का नाम है.

मैं किस हाल में हूं कह नहीं सकता,
मेरी हर सांस पर तेरा ही नाम है.

तेरे सामने जो कह नहीं सकता,
कह रहे ये गीत, गजलें तमाम हैं.

कोई लाख कहे कि हैं गीत मेरे,
ये गीत सारे तेरे ही नाम हैं.

प्यार में किस्मत का क्या रोना,
प्यार किस्मत का दूसरा नाम है.

प्रेम में है प्रभु दौड़े चले आते,
मेरे प्यार का यह क्या अंजाम है.

तुम पास होकर भी अब दूर क्यों हो,
बता, तेरे दिल का क्या पैगाम है.

छिपाने से कभी छिपता नहीं प्यार,
सदियों से यह तो चर्चा-ए-आम है.

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